किसी तरह मैंने इन सब गंदी बातों से ध्यान हटाकर सो गया.लगभग आधी रात में मेरी नींद खुली और मुझे ज़ोर से पेशाब लगी थी.

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मैं तो दीवार के तरफ था और उतरने के लिए चाची के उपर से लाँघना पड़ता था.

लालटेन भी बहुत धीमी जल रही थी और अंधेरे में कुछ साफ दिख नहीं रहा था.

फिर भी मैं नहीं माना और मैंने सोचा कि धीरे से अपनी एक उंगली उनकी पैंटी के साइड में से अंदर डालूं.

मैंने धीरे से अपनी उंगली मोडी और उनकी जांघों के बीच में पैंटी को थोडा खीच कर एक उंगली अंदर डाल दी.

पर वहाँ चाचीजी को अकेले में एक ही बिस्तर पर पाकर मेरे मन में अजीब सी हलचल मची हुई थी.

मेरा लंड एक खड़ा था और दिमाग़ में सिर्फ़ चाची की जवानी ही दिख रही थी.

लेटने के बाद मैं चाची के पास सरक कर अपना एक हाथ चाचीजी के पेट पर रख दिया.

थोड़े इंतजार के बाद जब देखा कि वो अब भी सो रही थी मैंने अपना हाथ थोडा उपर सरकाया और उनके ब्लाउस के उपर तक ले गया.

उनकी एक चुची की आधी गोलाई मेरे उंगलियों के नीचे आ गयी थी.